रात ने मेरे लिए अपने उजाले कितने कम कर दिए हैं। मैं चाँद थोड़े ही हूँ। रात की विनम्रता भर हूँ।
रचना 261815 मार्च 2021भाषा / Languageहिन्दीEnglishरात ने मेरे लिए अपने उजाले कितने कम कर दिए हैं।✦रात ने मेरे लिए अपने उजाले कितने कम कर दिए हैं। मैं चाँद थोड़े ही हूँ। रात की विनम्रता भर हूँ।कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें