भाषा / Language
हम सबसे बड़ा दुःख मन में
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हम सबसे बड़ा दुःख मन में
उससे छोटा दुःख पीठ पर
उससे छोटा दुःख उंगलियों पर
उससे छोटा दुःख ज़ुबान पर और सबसे छोटा दुःख आँखों में रखते हैं
इसी छोटे से बड़े क्रम में हम टूट जाते हैं।
*ये डॉल बुद्धा परसों खरीद कर लायी। इनकी मुस्कान और आंखों के एक्सप्रेशन में एक घोर आकर्षण महसूस हुआ मुझे। जैसे कह रहे हों....एक ही तो दुःख चुना है तुमने ।निश्चिन्त रहो... दुखेगा नहीं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें