भाषा / Language
मेरा मुझमें कुछ नहीं
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मेरा मुझमें कुछ नहीं ....
मैं किताब पढ़ते वक्त ही उस पर अपना मन लिख देती हूँ।
उस पल आये ख्यालों को एडिट करना मुझे आता भी नहीं। जो है सो है।
आज कुछ पन्ने फिर पढ़े....जो मन ने कहा लिखती गयी।
नरेश जी बेहद खूबसूरत रचते हैं। कम शब्दों में कविता कहने की उनकी पकड़ सीखने लायक है। आप को किताब मुबारक प्यारे कवि💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें