भाषा / Language
तस्वीर से अब तुम्हारे लिखे को चूमने पर आ गयी हूँ
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*तस्वीर से अब तुम्हारे लिखे को चूमने पर आ गयी हूँ...
इंतज़ार नज़र से आवाज़ पर आ गया है।
क्या तुमको महसूस होता है स्पर्श ?
इन उंगलियों
इन आँखों की
उदासी का।
*तुम किताब की तरह आना ।मैं फूल की तरह आउंगी। हम कहीं नहीं जाएंगे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें