कल्पनाशब्दों के बीच
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तुम्हें गुम नहीं होना चाहिए

तुम्हें गुम नहीं होना चाहिए.... *मैं दो चाँद तो संभाल सकती हूँ.... एक रात में दो दो रातों की उदासी पी नहीं सकती। *उदास दिन चुभ ही तो रहे तुम चुप्पी वाला भाला ही रख दो मुझ पर मौजूदगी लगे तो सही *बोल नहीं रहे.... अगर भूले नहीं हो तो हवा में नाम ही लिख दो उंगलियों की महक से भर जाने का मन है। *वक़्त को भी बद्दुआ लगे मेरी... अगर मैं न मिल सकी तुमसे तो वो भी जाया ही होता रहे । *दो शहरों में कितनी भी दूरी हो कल्पना नियति मांग लेगी प्रेम से जल्द बनूंगी दहलीज़ दो शहरों के बीच दूरी होना दूर होना नहीं होता कल्पना के लिए तो कत्तई नहीं *अब तो आवाज़ झलक तस्वीर शब्द सब छूट रहे.... क्या हमारे पुल, डोंगी और प्रेम सब डूब गया? सच कहना। *उदासी का रंग नीले से स्लेटी स्लेटी से सफेद होने पर तुला है। आ जाओ *जो मिला नहीं उसके छूटने का डर कहाँ रखूं? मन मनाए मानता नहीं ... तुम नहीं समझोगे *लिख कर बताया तो क्या ही बताया दुःख एक दुःख मैं ढो लूंगी.... कहा तो था तुमसे। शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें