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मैं प्रेम में मछली सी रहूँगी

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मैं प्रेम में मछली सी रहूँगी .... मेरी स्थिरता सिर्फ़ पानी पहचानता है। वो पानी वाला जाल तुम बुन दोगे क्या?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें