कल्पनाशब्दों के बीच
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तुम्हारी आँखें बस हमेशा मेरा मन देखती रहे । इसी चाहना को पा…

तुम्हारी आँखें बस हमेशा मेरा मन देखती रहे । इसी चाहना को पाल रही। बस एक तुम ही हो जो ये जादूगरी जानते हो। वक़्त बदलेगा तो सब बदलता जाएगा ।तुम बस आँखें मत बदलना । मैं मन नहीं बदलूंगी। हमेशा सोचती हूँ क्यों पूछती हूँ कैसे हो?शायद सोचती हूँ कि उस एक पल के लिए ही सही तुम्हारी आँखें मेरा मन पढ़ लेंगी😊😊 और कोई बात नहीं। तुम हमेशा आस पास रहते हो इसको मैं और मेरी आत्मा ही प्रमाणित कर सकती है। शायद ये हवा भी बता दे ...पूछ कर देखो। स्कूल जा रही।अभी कार में "तुम मेरे पास होते हो कोई दूसरा नहीं होता " गीत बज रहा है। ईश्वर भी मेरा साथ देता है।वो पढ़ लेता है मेरा मन ....ठीक तुम जैसे। *ज़िन्दगी एक बार फिर खूबसूरत है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें