भाषा / Language
थकी थकी आंखें.. थकान सा रख लो
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थकी थकी आंखें.. थकान सा रख लो
रेत से बनते उजड़े मकान सा रख लो
हर कोई हँस ही रहा लूट कर ये हँसी
कोई तो एक पैसा ईमान सा रख लो
दो पैर डाल कर बैठी है नदी कबसे
चलो सब्र को ही तूफान सा रख लो
बेवजह ही तो धड़कता है कमबख्त
टूटा दिल, पुराने सामान सा रख लो
मुश्किल तो होगी छिपाने में मुझको
कल्पना को कभी रूमान सा रख लो
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें