भाषा / Language
कल्पना को अप्रेमपत्र
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कल्पना को अप्रेमपत्र...
प्रेम में दुःख दुःख जैसे हों भी तो दुःख जैसे दिखने नहीं चाहिए ।
मरीचिका जानती हो?
बस ... उस का ठीक उलट
उठा सकती हो दुःख जैसे अदृश्य दुःख तो करती रहो मुझसे प्रेम
मैं मौन रहूँगा।
मेरे पास यही एक आश्वस्ति है।
वह तुम्हारी रहेगी।
ख़त को "तुम्हारा" लिख कर बोझिल क्या करना।
"हूँ " लिखकर विराम देता हूँ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें