भाषा / Language
कविता में कल्पना तय करती है कि तुम कितनी देर के कवि हो
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कविता में कल्पना तय करती है कि तुम कितनी देर के कवि हो?
शब्द तय करते हैं कि तुम कवि क्यों हुए?
पाठक इस प्रशस्ति की हस्ताक्षर वाली मोहर हैं
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें