कल्पनाशब्दों के बीच
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हाँ में "नहीं" होकर

हाँ में "नहीं" होकर नहीं में "हाँ" होकर मैंने बचाए रखा है प्रेम दरक जाना भी प्रीत है। *अभी घर के दूसरी तरफ पहाड़ों पर किसी ने ये नयन डरे डरे गीत लगाया है। पूरी घाटी गूंज रही।मेरा मन पढ़ लेने का शुक्रिया उसे। मेरी दुआ लगे😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें