भाषा / Language
सुनो चाँद
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सुनो चाँद !
ये इश्क़ वाली पश्मीना लपेट दो....
और ज़िन्दगी वाला खद्दर ओढ़ लो ।
जश्न निपट गया ....
*अब कुछ दिनों के लिए विदा।fb से दिल हटा रहे धीरे धीरे।लिखा हुआ समेटेंगे इस बीच ।
ख़्याल रखिये ।
याद आते रहें। भूलना मना है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें