कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2546

भाषा / Language

सुनो चाँद

सुनो चाँद ! ये इश्क़ वाली पश्मीना लपेट दो.... और ज़िन्दगी वाला खद्दर ओढ़ लो । जश्न निपट गया .... *अब कुछ दिनों के लिए विदा।fb से दिल हटा रहे धीरे धीरे।लिखा हुआ समेटेंगे इस बीच । ख़्याल रखिये । याद आते रहें। भूलना मना है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें