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मेरे लिए.....तू

मेरे लिए.....तू शुक्रगुज़ार हूँ तेरी पनाहों की , तेरे संग गुज़रती राहों की मेरे लिए अनमोल फरिश्ता है तू , मेरी हर ख्वाइश में रंग भरता है तू तू पतंग , तेरी डोर हूँ मैं , बेफ़िक्र रह सिर्फ़ तेरी ओर हूँ मैं सज़दा उन पलों का हम तुम्हारे हुए , फक्र उन लकीरों का आप हमारे हुए शिकन और सुखन स्वाद चखे हैं तुझ संग , इत्मीनान है ,सुर्ख है हमारे इश्क का रंग तू सीप ..... मुझे मोती सा ढांके रखना , अनमोल सा "यूँ" ही आंके रखना
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें