कल्पनाशब्दों के बीच
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ज़िन्दगी उसे ही निहारती है जो उसे पलक झपकाए बिना ताड़ता है।

ज़िन्दगी उसे ही निहारती है जो उसे पलक झपकाए बिना ताड़ता है। प्रेम भी छोटी छोटी ज़िन्दगी रोज़ है मेरे लिए। उड़ने के लिए पंख... और लौट आने के लिए जड़ें दे दो ...... इश्क़ ज़्यादा कुछ नहीं मांगता😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें