कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2512

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आवाज़ में भी पड़ गई हैं दरारें

आवाज़ में भी पड़ गई हैं दरारें कहो तो ... आज तुम्हें क्या कह कर पुकारें ? *अभी मेरे पास सादी सुबह है हथेलियों में ....यही रख लो ना
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें