कल्पनाशब्दों के बीच
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एक पूरा दिन दरमियाँ रख कर नाप सकती हूँ हमारे बीच की दूरी।

एक पूरा दिन दरमियाँ रख कर नाप सकती हूँ हमारे बीच की दूरी। दो शहरों को नज़दीक प्रेम ला सकता है तो कल्पना क्यों नहीं ला सकती? ला सकती है ना? 😊😊 शुभरात खुश रहिये
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें