कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2451

भाषा / Language

प्रेम में चुप्पियाँ हैं तो तुम हो

*प्रेम में चुप्पियाँ हैं तो तुम हो चुप्पियों में प्रेम है तो मैं हूँ *चुटकी में उदास हो सकती हूँ... तुम याद आओ तो सही। *तय वक़्त पर कभी नहीं मिलता प्रेम... मिल जाता तो प्रेमी होता *तू मेरा पसंदीदा सैयाद है.... मुझे पसंद है तेरी हर गिरह *खर्च होने के लिए तस्वीर और शब्दों से खेलना अच्छा विकल्प है। खेलती रहती हूँ।😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें