कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2410

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आँखों की ज़द में ना सही

आँखों की ज़द में ना सही .... आँखों की ज़िद्द में रखा है तुम्हें ...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें