कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2411

भाषा / Language

फूल और पत्थर के बीच मैंने तुमको चुना

*फूल और पत्थर के बीच मैंने तुमको चुना.... तुम न पिघले ....न बदले * दुःख पत्थर से बनते हैं इसलिए कड़े हैं। मैं एक साँझा अक्षर वाला पत्थर ढो लूंगी। * प्रेमी ईश्वर ने दीवार पत्थर की और दर काठ का बनाया... आना जाना सहूलियत भरा नहीं सलाहियत भरा होना चाहिए। * हम पत्थर को छुए बिना नहीं बदल सकते ..... मेरे पास एक पारस है ...वो छूता है पर मुझे बदलने नहीं देता। *मेरे पहाड़ों में पत्थर पर रंग लग जाए तो लोग पूजने लगते हैं... तो मैं कहाँ गलत हूँ... कि कब से तुम्हारे रंग में रंग गयी हूँ? *ईश्वर जिससे बना है वही तो देगा.... मुझे तुम मिले... पहाड़
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें