कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2409

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खुद से बावस्ता होना सीख रही हूँ

*खुद से बावस्ता होना सीख रही हूँ .... प्रेम में चिटकनी तुम्हारी तरफ से लगी है। *तुम्हारी टोह में गुज़र जाता है दिन तुम्हारा नाम चाँद के सिवा क्या होता? जिस तौर भी मिलते हो ... तर जाती हूँ। शुभरात💐💐💐 तस्वीर के साथ बस नए साल जुड़ते हैं ....हम खुद बहुत पीछे छूट जाते हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें