कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2306

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अगर पास एक ही सुख है

अगर पास एक ही सुख है .... तो वो है और अगर एक ही दुःख है... तो भी वही है। इन दोनों पंक्तियों में सिर्फ़ प्रेम है और सिर्फ़ मेरा है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें