कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2305

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मैं मीठी ही हूँ

मैं मीठी ही हूँ .... अब तुम जड़ की तरफ से गन्ना चूस रहे तो मैं क्या करूँ? ज़िन्दगी ने आँख मारते हुए मुझसे कहा .....😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें