भाषा / Language
जिंदगी टुकड़ों में ही मिलती है
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*जिंदगी टुकड़ों में ही मिलती है....
अपने लिए पूरा चाँद हमें खुद ही बनाना पड़ता है।
*अगर मैं कहूँ ...
वो दूर से मुझे ज़िंदा रखता है।
मान लोगे क्या?
*फिर एक रोज़ हम खोना पाना भूल गए।
होना सीख लिया।
हम हैं अब...
*सलीका तो मिल जाता है ....
बस ....उस सरीखा ही नहीं मिलता।
शुभरात💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें