कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2291

भाषा / Language

प्रेम जो देना चाहता है वही दूजे से पहले माँग कर देखता है।

प्रेम जो देना चाहता है वही दूजे से पहले माँग कर देखता है। मिलान कर देखता है कि उसका देने वाला हिस्सा कम तो नहीं। ये हिसाब की बात नहीं.... बेहिसाबी है.... तुम क्या समझोगे?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें