कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2290

भाषा / Language

साँझ की बाती से हो तुम

**साँझ की बाती से हो तुम..... दिन और रात के बीच की सांखल **प्रेम परखना एक बात है ....सीधी लकीर खींचना तुम तक दूसरी। मैं हृदय पर तुम्हारा नाम लिख चुकी हूँ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें