रोज़ सोचती हूँ ... अल्फ़ाज़ों से परहेज़ करूँगी। फिर सोचती हूँ... कैसे उसे इश्क़ से लबरेज़ करूँगी? सुबह सुबह तुम और मैं खिले मिले 😊😊