कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2175

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मुझे उसे संजोने का ख़ब्त थी

मुझे उसे संजोने का ख़ब्त थी... वो मुझमें ही कहीं खो गया। शुभरात💐💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें