कल्पनाशब्दों के बीच
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ये तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले इमाद हैं।

ये तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले इमाद हैं। आप इनके चेहरे पर हमेशा यही मुस्कान पाओगे । जब भी पूछती हूँ ...और इमाद कैसे हो ? कहता है... सई हूँ।आप सई हो? मुस्कान तो सभी की होती है पर किसी किसी की आँखें साथ मुस्कुराती हैं। मेरे इमाद की आँखें मुस्कुराती हैं । हर काम को दिल से पूरा करने के लिए और शरारती रहने का शुक्रिया। खूब दुआएँ तुम्हें।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें