भाषा / Language
कल एक मित्र ने कहा मैंने दो प्रेमी मित्रों की किताब एक ही श…
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कल एक मित्र ने कहा मैंने दो प्रेमी मित्रों की किताब एक ही शेल्फ़ में आसपास रख दी है जबकि वो दोंनो अब एक दूसरे के प्रेम में नहीं हैं।
इस बात पर मैंने उनसे कहा ऐसा गज़ब न कीजिये ...नीली उदासी उग आएगी वहां पर भी।
दो प्रेम में नहीं प्रेमियों के बीच चाहे शब्द खत्म हो चुके हों.... चाहे उनके बीच प्रेम न रहा हो पर अब भी वो एक दूसरे में रहते हैं । यही बदला हुआ पता तो उनकी उदासी है।
हैरान हूँ...
रात होने तक मेरी बात सच हो गयी ।एक नीली उदासी हम सब पर फैल गयी.....अपने प्रेम से निकल कर नीला प्रेम हम सब पर रिस गया।
तुम्हारे बुकशेल्फ के आसपास भी हर चीज़ नीली हुई क्या ?
हुई तो जरूर होगी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें