कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2103

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मैंने उसे कभी भी प्रार्थनाओं में नहीं रखा

मैंने उसे कभी भी प्रार्थनाओं में नहीं रखा ...... पहले ज़िद्द में रखा आजकल वो धैर्य में रुका हुआ है। वो बस रखा रहा मुझमें ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें