कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2088

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हम कैसे से हैं

हम कैसे से हैं? बंद दरवाजों पर खिड़कियों के उगने का इंतज़ार करते हैं। और कहते हैं... अच्छे लगते हो .... रुके हुए मुझमें एक तुम ... और एक ये चाँद
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें