कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2073

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अक्सर कॉफी टेबल को छोड़ कर जाते हुए

अक्सर कॉफी टेबल को छोड़ कर जाते हुए ..... हम अपना एक बड़ा हिस्सा खाली कप की तह पर छोड़ आते हैं । मुलाकात शब्दों की होती है और तो और कॉफी भी शायद आंखें ही पीती हैं। जुड़ती तो सिर्फ़ मुस्कान है। मिलना तय नहीं होता । तय तो सफर होते हैं बैठे बैठे अगले ... पिछले ... और शायद आने वाले सभी... उसी कॉफ़ी टेबल पर । *एक रोज़ जो आया ....और फिर कभी नहीं आया।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें