भाषा / Language
अक्सर कॉफी टेबल को छोड़ कर जाते हुए
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अक्सर कॉफी टेबल को छोड़ कर जाते हुए .....
हम अपना एक बड़ा हिस्सा खाली कप की तह पर छोड़ आते हैं ।
मुलाकात शब्दों की होती है और तो और कॉफी भी शायद आंखें ही पीती हैं।
जुड़ती तो सिर्फ़ मुस्कान है।
मिलना तय नहीं होता ।
तय तो सफर होते हैं बैठे बैठे
अगले ...
पिछले ...
और शायद आने वाले सभी... उसी कॉफ़ी टेबल पर ।
*एक रोज़ जो आया ....और फिर कभी नहीं आया।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें