भाषा / Language
Dear दिलबरो
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Dear दिलबरो....
तुम्हारी किताब की पहली दो कहानियों में क्या-क्या छू गया ....भेज रही हूँ।
तुम बेहद महीन कल्पना करती हो। कभी - कभी तो पिछले पन्नों में लौटना पड़ा कि क्या कुछ छूट गया मुझसे कि ये सिरा हाथ नहीं आया मेरा। शब्दों का चयन तो चमत्कारी है।
लिखती रहो.... तुम लिखने के लिए ही बनी हो।
Sushma Gupta love u.
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें