भाषा / Language
सुनो मनोरमा
✦
सुनो मनोरमा...
बत्तीस पन्ने ही पढ़े अभी तक।
यही तीन बार पढ़े।
इन्हें लिखने वाले के लिए मैं कुछ भी लिखने में असमर्थ हूँ... सिर्फ़ सुन रही कल से।
जो जो सुना ...
पन्नों में लिख दिया।
अजित सिंह तोमर जी 💐💐
अभी कई दिन और सुनना बाक़ी है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें