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रचना 2015

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सूरज से मिलने के लिए रात को क्यों धकेलना

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सूरज से मिलने के लिए रात को क्यों धकेलना .... चुपचाप सूरज के बगल में बैठ जाओ..... और तब तक बैठे रहो जब तक वह आपको hello बोलना न सीख ले। आदत से पहले आपको आदी होना पड़ता है। Completed 3 months of 2 hours mee time ...😊😊😊 योगा .... going for the fourth spell. खुद को कस कर प्यार वाली झप्पी... too good यार कल्पना. 😊😊😊 *तस्वीर अभी सुबह की है!मुस्कान आज अपने लिए है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें