जो दोगे वही तो रोपती रहूँगी... आजकल इधर मौन और इंतज़ार की फ़सल लहलहा रही। शायद प्रेम पड़ने वाला है...
रचना 201612 जुलाई 2020भाषा / Languageहिन्दीEnglishजो दोगे वही तो रोपती रहूँगी✦जो दोगे वही तो रोपती रहूँगी... आजकल इधर मौन और इंतज़ार की फ़सल लहलहा रही। शायद प्रेम पड़ने वाला है...कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें