कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2016

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जो दोगे वही तो रोपती रहूँगी

जो दोगे वही तो रोपती रहूँगी... आजकल इधर मौन और इंतज़ार की फ़सल लहलहा रही। शायद प्रेम पड़ने वाला है...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें