कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2014

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आरज़ू और इबादत में फ़र्क है बहुत

आरज़ू और इबादत में फ़र्क है बहुत... लिखूँगी तो दिखाई देगा नहीं.... कहूँगी तो सुनाई देगा नहीं.... जाने देते हैं... इश्क़ इश्क़ की बात है। शुभरात
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें