कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2001

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वो ज्यादातर न अनुवादित होता है ना ही परिभाषित

वो ज्यादातर न अनुवादित होता है ना ही परिभाषित..... ऐसा जैसे कि सांझ में खिड़की से बाहर निकलकर मध्यम सूरज की बेहद अंतिम .... बस मरती हुई सी लौ को पकड़ने जैसा *तस्वीर zoom करके देखने पर एक प्रेमी जोड़ा मिलेगा ।उनको बहुत बहुत प्यार
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें