कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2000

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तेरे आकाश में मेरे बहुत सारे काश चिपके हैं

तेरे आकाश में मेरे बहुत सारे काश चिपके हैं.... टूटते होंगे तारे.... मैं टूटते काश के इंतज़ार में हूँ। *तस्वीर कल रात की है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें