भाषा / Language
"गुलाब " दिखाकर
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"गुलाब " दिखाकर......
ज़िन्दगी ......
"खट्टे अंगूर" बेच देती है
वो भी .....
बिना किसी "इश्तेहार" के
और हम....
ठगे से जाते हैं .....
ज़िन्दगी के इंतज़ार में
कारोबार .......अच्छा है ज़िन्दगी तुम्हारा
पर क्या करें .....
"इश्क" भी तो लट्टू है हमारा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें