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रचना 1999

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हृदय के कंकड़

हृदय के कंकड़... कोई सिर्फ़ दो उंगलियों से निकालता है कोई मुट्ठी भर भर ये मुख़्तसर सी बात है। हर बार स्त्री - पुरुष कह देना ठीक बात नहीं !
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें