कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1995

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सच ... बहुत खूबसूरत हैं

सच ... बहुत खूबसूरत हैं ... आंखें तुम्हारी पर जब तुम मेरे जैसे नहीं बन सकते तो मैं तुम्हारी तरह कैसे बन जाऊं?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें