भाषा / Language
कभी आँसू
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कभी आँसू
गिरा डाले
कभी अलफ़ाज़
बहा डाले
हर बार "मैं "
घंटों भीगती रही
और ये
"कमबख्त दिल "
सिर्फ
चंद लम्हों के लिए
बस "हल्का" हुआ
"ये दिल " हद में है
या
" मैं "बेहद हूँ ?
*तस्वीर सुबह सुबह की है जब खुद से बातें करना अच्छा लगता है। जैसे हो वैसे ही दिखते हो ।फिर खुद पर दिन चढ़ जाता है ।आप खर्च हो जाते हो रात तक।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें