कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1950

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जो अपने हाथ में है

जो अपने हाथ में है .... बस वही सुख है । दुख ...अभी दूजे के पास है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें