कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1921

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आज भी अपना दुख रखने चले आता है

आज भी अपना दुख रखने चले आता है.... प्रेम अपना वाला दरख़्त कभी नहीं भूलता। Peace lily ...💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें