कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1915

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आइना मेरा दोस्त

आइना मेरा दोस्त परछाई सखी है वजूद संग आत्मा भी सहेज कर रखी है मैं तनहा कहाँ हूँ ? " सफ़र" में हूँ मेरा जरूरी सामान बस यही है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें