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रचना 1916

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कविता भी कितनी हद तक "मजदूर" है

कविता भी कितनी हद तक "मजदूर" है... क्या कुछ नहीं ढ़ोती अपनी पीठ पर... गज़ब धैर्य 👌👌👌
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें