कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1813

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चौकोर नहीं

चौकोर नहीं ...... आज गोल किताब पर लिखूंगी लाओ चाँद .....अपने कुछ पन्ने दे दो रोज़ तुम ही क्यों रहो .... ग़ज़ब ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें