भाषा / Language
कविता तो "मैं
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कविता तो "मैं "
बेलफ्ज़ होकर भी कर सकती हूँ .....
पर तुम्हें ....
कल्पना के पंख
पहनना रास नहीं आएगा
लो ... तुम्हारे लिए
शब्द ही कतार में खड़े कर देती हूँ .....
देखो ....कुछ समझ आये तो
कविता का वजूद.....कुछ शब्द ....कतार में ... मैं
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें