कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1811

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Farha Uves जी..💐💐 मेमोरीज़ में आप मिल गयीं। सोचा..love u ब…

Farha Uves जी..💐💐 मेमोरीज़ में आप मिल गयीं। सोचा..love u बोल दूँ। किताब को आपका दिया आवरण और मेरी कल्पना कई दिन हुए ......... कई दिन हुए ...... वक़्त गीला सा है , फिसल नहीं रहा मन जमा सा है , पिघल नहीं रहा नकाब ओढ़ा सा है , ढल नहीं रहा जवाब दिया सा है , हल नहीं रहा इश्क जर्रा सा है , महल नहीं रहा दर्द असल सा है , नक़ल नहीं रहा रिश्ता रूठा सा है , संभल नहीं रहा आंसू टंगा सा है , टहल नहीं रहा साथी तिनका सा है , संदल नहीं रहा ख़याल उतरन सा है , पहल नहीं रहा अंदाज़ रुखा सा है , ग़ज़ल नहीं रहा जिस्म टूटा सा है , चल नहीं रहा वो खफा सा है , बहल नहीं रहा लम्हा चिपका सा है , बदल नहीं रहा कई दिन हुए .....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें